9/20/21

आसमान को छू रहा है तू




आसमान को छू रहा है तू

किस और उडचला है तू
सही दिशा सें बेखबर है तू
मार्ग तेरा कुछ और है डर रहा है तू
चल चल पकडके मेरा साथ तू
मार्ग तेरा वही है जो लक्ष देख रहा है तू
मत डग मगा तू तेरे साथ खडा हूँ याहा मैं
डर को मार कर सही दिशा मैं अब उड रहा है तू
अपनी शैर्य की गाथा लिखणे चला है तू
उचे उचे आसमान को छूरहा है तू 
अपने अतितके डर को छोडकर अब उडचला है तू
साथ मैं ने भी तेरा छोड दिया  है क्यूकी डगमगाना भूल गया है तू।
अब आसमान को छू रहा है तू....

          आसमान को छू रहा है तू

                                              देवेंद्र...शब्द कवी✍️

8 comments:

  1. अप्रतिम, बहोत खुप सर👌👌👌👌👌👍👍🙏🖕🔥🔥🔥🔥

    ReplyDelete
  2. खूप प्रेरणादायी रचना केली सर👌👌👌👌

    ReplyDelete
  3. खुप सुंदर रचना केली बंधू 👌🏻👌🏻👌🏻😊😊😊😊

    ReplyDelete
  4. धन्यवाद ताई🙏🙏🙏

    ReplyDelete
  5. अप्रतिमच सर 👌 👌👌👌👌🙏🙏

    ReplyDelete

Comments (समीक्षा साठी )
ह्या Blog वर Subscribe Button Click करावे.

सुंदर माझं कोकण....

सुंदर माझं कोकण.... सुंदर तो नजारा सुंदर तो देखावा डोंगराच्या त्यारांगा त्यावर हिरवी रंगावा त्या हिरवा रंगावा तून उडतो असतो ...