मोहोबत
जब हम पहली बार मीले थे
कहा होती है अब वो मोहोबत
अब तो जीस्मसें करते हे लोग मोहोबत
उन्हे क्या पता है मोहोबत तो दिलो सें की जाती है।
रुठना मनाना तुम्हे आता है
हमतो मोहोबत करते है
तूम नें छोड ने के बाद भी
हम आप सें मोहोबत जो करते है।
शायर को तो शायरी आती है
शायर को तो शायरी आती है
मगर हमें तुम्हे ,मगर हमें तुम्हे
देखते सें ही मोहोबत हो जाती है ।
देवेंद्र ...शब्द कवी.✍️
अप्रतिम👌👌👌👌🙏🙏
ReplyDeleteअप्रतिम 👌👌😊😊💐💐
ReplyDeleteअप्रतिम बहोत सुंदर सर 🪴💐💐💐💐👌🍁💥💦
ReplyDeleteखूप सुंदर रचना 👌👌👌👌
ReplyDeleteदेवेंद्रजी... बढ़िया प्रस्तुती की आपने।👌
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