मीलतो नहीं सकते हों
मगर मोहोबत हमसें करते हों
कुछ आरजू हे हमारी
बस युही यादो में चूप चूप कर
हम सें येसे ही हमें मीला करो ।
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
आरजू युही हमारी पुरी करते रहो
बिना मिलें ही हम सें मोहोबत करते रहो
कुछ अधुरी सें ख्वाईश हमारी तुम्हारी
बिना मिलें हूँवे मोहोबत में युही पुरी करती रहो
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
आरजू
🏵️ शब्द कवी देवेंद्र...✍️🏵️
लाजवाब, शानदार प्रस्तुती!✍️👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद सर जी
ReplyDeleteलाजवाब प्रस्तुती 👌👌
ReplyDeleteअप्रतिम रचना केली सर 👌👌👌👌
ReplyDeleteAwesome 👍
ReplyDelete