9/30/21

आरजू

मीलतो नहीं सकते हों
मगर मोहोबत हमसें करते हों
कुछ आरजू हे हमारी 
बस युही यादो में चूप चूप कर
हम सें येसे ही हमें मीला करो ।

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

आरजू युही हमारी पुरी करते रहो
बिना मिलें ही हम सें मोहोबत करते रहो
कुछ अधुरी सें ख्वाईश हमारी तुम्हारी
बिना मिलें हूँवे मोहोबत में युही पुरी करती रहो
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁
                           आरजू
                                       🏵️ शब्द कवी देवेंद्र...✍️🏵️

5 comments:

Comments (समीक्षा साठी )
ह्या Blog वर Subscribe Button Click करावे.

सुंदर माझं कोकण....

सुंदर माझं कोकण.... सुंदर तो नजारा सुंदर तो देखावा डोंगराच्या त्यारांगा त्यावर हिरवी रंगावा त्या हिरवा रंगावा तून उडतो असतो ...