9/27/21

जींदगी और वक्त...

               

  आज बोहोत दिनो बाद युही 

  अकेला मैं बैठा हूँ वा था ।
आज खुद के बारे मैं सोचरहा था
तो पता चला की जींदगी क्या है
कोण अपणा दोस्त और सही है।


मन के अंदर सें आवाज आई कें
जींदगी ही आपका उचीत गुरु
और मार्गदर्शक  है।


 हर मोड पण संभाला 
जींदगी ने ही तो है ,
वक्त तो काल चक्र की भाती है।


वक्त उस के समय के हीसाब सें
क्या सही ,क्या गलत,हर इंसान
हर रिशते  सब दिखा देते है ।


मगर जींदगी सब देखते समय
हमें सय्यम रखना सीखा देती है।
और योग्य दिशा मैं लेकर जाती है।


वक्त दिखाता है और जींदगी सीखाती है ।

                       देवेंद्र शब्द कवी...✍️

5 comments:

  1. 👌👌👌👌👌👌👌बहुत खूब फर्माया सर

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  2. बहोत खुब लिखा है 👌👌👌👌

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  3. व्वा...बढिया रचना देवेंद्रजी!✍️👌👌👌

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  4. बहोत बढीया 👌👌👌👌🙏🙏

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  5. व्वा व्वा क्या बात है सुपर्ब रचना 👌👌👌🏅🏅🏅

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Comments (समीक्षा साठी )
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