तुही माता है ,तुही शक्ती,
तुही आदि,तुही अंत है।
तुही ममता का सागर ,
तुही करुना का सागर,
अपार तेरी महीमा है।
तुही माँ वैष्णवी और
तुही तो काली है।
तुही तो हर भक्त को संभालती है
नऊ रुपो का स्त्रोत तुही तो है।
नवरात्री में तुम्हारा महीमा अपार है
शब्द कवी देवेंद्र...✍️
जय मातादी
ReplyDeleteसुंदर प्रस्तुती 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼
ReplyDeleteजय मातादि 🙏🙏🙏
ReplyDeleteजय माता दी 🙏🙏🌹🌹
ReplyDeleteअतिशय सुंदर रचना 👌👌👌👌👌🙏
ReplyDeleteवाह खूपच सुंदर आणि अतिशय भक्तीमय खूप सुंदर शब्दात माताचं वर्णन केलं 🙏🙏🙏👍👍👍👌👌👌👌
ReplyDeleteखूप छान
ReplyDeleteजय मातादी 👌👌👌
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteसुंदर लिहंलय...जय नवदुर्गा मैय्या!��������
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