9/29/21

होसला

किस और दरदर भटक  रहा है तू
किस और चल पडा है तू
🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃
आँँखे खोल कर देख जरा तू
जो सामने हे वही पाया हे तू
🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃🏃
कर्म तेरा तू खुद्द लिख रहा था
आज वही कर्म नें तुझे याहा है पोहोचाया
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डगमगा गया इत नें में तू
डर क्यु  लग ने लगा है तू
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चल चल अब सब कुछ भुल कर तू
साथ साथ चल अब मेरे साथ तू
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उचा और अब तूझे उडना है
खुद का आसमान तूझे बनाना है
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डगमगानें नही दूंगा तूझे
दटके सामना अब करना है तूझे
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देख देख अब कितनें उचा उडा है तू
आसमान भी तूझे कम पडने लगा है तूझे
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होसला अब बुलंद हे तेरा और उचा उडने चला जा तू
अब साथ मेरा छोडके उडने लगा हे अब तू
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹होसला🌹🌹🌹🌹🌹🌹

                                 शब्द कवी ...देवेंद्र✍️


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